दूसरे की चीज़ को हड़पना !

 हम आपको दूसरे की चीज़ की अभिलाषा करना या हड़पने के पाप से अवगत कराएंगे। बहुत से लोग किसी के मकान में घुस कर स्टे आर्डर लेकर कब्ज़ा कर लेते है। कुछ लोग किसी की चीज़ लेकर कभी लौटते नहीं। ज़मींन पर अवैध कब्ज़ा कर लिया जाता है। सत्ता या अधिकार से सुसज्जित अधिकारी या पुलिस अफसर डरा कर दूसरे के साथ दुर्व्यवहार करता और रिश्वत मांगता है। दूसरे व्यक्ति की कमजोरी या मजबूरी का फायदा उठाने वाले हज़ारो की तादाद में देखने को मिलते है बाइबिल में डेविड या दाऊद राजा की कहानी है जिसमे राजा ने अपने निचे कार्यरत सैनिक की पत्नी बतशेबा के नाजायज़ यौन सम्बन्ध स्थापित किये और उसे युद्ध में आगे पोस्ट करके मरवा दिया। परमेश्वर ने अपने दास नाथन भविष्यवक्ता को भेजा और उसे कड़ी सजा सुनाई ध्यान से सुनिए ,”मैं ने अभिषेक करके तुझे इजराइल का राजा ठहराया और तेरे शत्रु को हरा कर तुझे सत्ता दी जिससे तू मेरे न्याय को अपनी प्रजा को कर सके, मैंने तुझे एक साधारण गड़रिये से राजा बनाया तुझे इजराइल और यहूदा पर शासन करने और रानियां और सन्तान दी ले साथ वैभव और सम्मान दिया। अगर यह थोड़ा था तो तूं मुझसे कहता मैं और तुझे दे देता। परन्तु तूने यूरिया जो हिती जाति का है को अमोनिओ के सामने युद्ध में आगे की पक्ति में जान बूझ कर भेजा जिससे वह मर जाये और उसकी खूबसूरत पत्नी को अपने महल में बुलाकर उसके साथ गलत काम क्या है। इस कारण तलवार कभी तेरे घर से नहीं निकलेगी और मैं तेरी पत्नियों को तेरी आँखों के सामने दुसरो को दूंगा। तूने यह काम छुप कर किया परन्तु तेरी पत्नियों के साथ दुर्वयवहार दिन दहाड़े इस्राल के लोगो के सामने होगा। तेरा बेटा भी जो इस व्यभिचार का नतीजा है मर जाएंगा। और प्रिय दर्शको यही हुआ। इस कहानी को आप २ शमूएल 11 -12 में पढ़ सकते है और देख सकते है कि कैसे दुनिया का बनाना वाला परमेश्वर पिता हमें दुसरे का कुछ भी हड़पने की सजा देता है। परमेश्वर की आज्ञाओं को ना मानना ,अपनी सत्ता को दुरूपयोग करना और गरीब का हक़ मरना बहुत महंगा पड़ता है। जब आप काम के लिए मजदूर को घर लाते है और अँधेरे तक काम करवा कर मजदूरी देने में हिचकिचआते है , रिक्शेवाले और कुली के साथ पैसे की बहस करते है तो आप हड़पने के पाप को करते है। बहुत से फॅक्टरी वाले वर्कर से साइन ज्यादा पैसे पर कराते है और आधी तन्खाह देते है। ऐसी बहुत सी बाते परमेश्वर की दृष्टि में बुराई की श्रेणी में आती है और इसके परिणाम अच्छे नहीं होते। आप और मैं दूसरे का माल हड़पकर धार्मिक स्थान पर चंदा या अन्य तरह के धार्मिक आडम्बर करते है परन्तु यह किसी काम का नहीं। क्योकि परमेश्वर न्याय और करुणा से प्रेम करता है और उसे न तो आपका पैसा चाहिए और ना ही गरीबो को दिए हुआ दान। उसके लिए अच्छे काम चीथड़े गंदे फटे हुए कपडे के सामान है जो पहने नहीं जा सकते। हमने इन कार्यक्रमो में विवेक या ज़मीर की आवाज़ को सुंनने के लिए बताया क्योकि यह परमेश्वर का लिखा हुआ कानून आपके अंदर है। बहुत से लोग परवाह ही नहीं करते कि उनका विवेक उन्हें क्या कह रहा है। परमेश्वर के बनाये हुए कानूनों को मानना और किसी समाज , देश और पीढ़ी दर पीढ़ी चलती हुई मान्यता पर चलने में बहुत अंतर है। परमेश्वर के नियम और कानून आपको सुरक्षित रखेंगे और लम्बी आयु से तृप्त करेंगे क्योकि वह मनुष्य से कही अधिक आपके ढांचे को जानता है। इसलिए यह भला होगा कि हम उसकी आवाज़ को सुने और भीड़ के पीछे मत जाये। जीवन देने वाले परमेश्वर आपसे प्रेम करता है और उसने आपको पाप ,बीमारी और मृत्यु से बचाने का प्रबंध उसने अपनी पुत्र येशु मसीह की बलि देकर किया। आपकी जिम्मेवारी यह बनती है कि आप उस पर विश्वास करे और उसके वचन बाइबिल को पढ़े जो आप को सान्तवना देंगे। आपको क्रोना के इस महामारी के समय में परमेश्वर को व्यक्तिगत रूप से जानना बहुत आवश्यक है क्योकि वह आपको मनुष्य, समाज और देश के लोगो के बीजी हुए बुराईयो के परिणाम से बचाएगा। बाइबिल मनुष्य को जीवन और मृत्यु में से एक को चुनने की हिदायत देते है और यह हमारे ´हाथ में है हम किसको चुने। इसके साथ हम आपको यह भी बताना चाहता है कि परमेश्वर आप को कितने भी बड़े पाप और बुराई से क्षमा करने को तत्पर है और आपके प्रति उसका प्रेम उसकी कमजोरी है। 

हत्या या हिंसा !

हम बाइबिल से बोने और काटने के बारे में बता रहे है जिसकी तुलना किसान के किसी बीज विशेष को डालने और वैसी ही फसल काटने से सम्बंधित है। हर नर और नारी का विवेक, ज़मीर या कॉन्शस परमेश्वर का लिखा हुआ कानून दिलो दिमाग में है और उसकी आवाज़ को ना सुंनना और बहाने बनाकर उससे भागना हमारे लिए जीते जी और मरने के बाद अपनी कीमती जिंदिगी को जोखिम में डालना है। बाइबिल की पहली पुस्तक केन और एबल की कहानी को बताती है जिसमे केन ने अपने सगे भाई की इसलिए हत्या कर दी क्योकि परमेश्वर ने उसके विश्वास का सम्मान किया और केन को यह अच्छा नहीं लगा। नफरत की इस आग ने उसे परमेश्वर के श्राप का वारिस बनाया और उसे भगोड़ा बनाना पड़ा और निरंतर छुपना और सामान्य जीवन से वंचित होना पड़ा। आज भी हत्या करने वाले को फांसी ,उम्रकैद और कई बरसो के लिए कारावास भुगतना पड़ता है। मनुष्य का जीवन परमेश्वर की दृष्टि में बहुत कीमती है और उसकी दृष्टि में नर या नारी दोनों का बराबर महत्व है। जहाँ बेटी और बेटे की एबॉर्शन से हत्या कर दी जाती है वहां परमेश्वर की दृष्टि में बुराई का प्रकोप होता है और आज दुनिया भर के देश क्रोना जैसी महामारी को भुगत रहे है। कोई भी व्यक्ति , समाज या देश अपनी गलत करनी के प्रभाव से नहीं बच सकता बेशक कितना भी ऊपरी आडम्बर कर ले। पाप की सजा मिलेगी है चाहे आप कुछ भी कह लो। परमेश्वर ने उन दस हुक्मो जो उसने इजराइल के लोगो को स्वतन्त्र होने का बाद दिया था हत्या न करने और किसी के लहूं बहाने की मनाही की है। अगर कोई देश, समाज या समुदाय परमेश्वर के इस हुकम को माने तो करोङो रूपये की बचत बंदीगृहों के संचालन और पोलिस की तनखाह के रूप में होगी। जीवन की सुरक्षा और लम्बी उम्र परमेश्वर की मर्ज़ी हर देश के हर बाशिंदे की है। जिस देश की धार्मिक विचारधारा दूसरे की हत्या करके संपंन्न होने की होती है वहां गरीबी का श्राप कभी खतम नहीं होता और वहां जीवन सुरक्षित नहीं होता। नफरत और पड़ौसी को प्रेम न करना गुस्से को जन्म देता है और परमेश्वर हमें क्षमा करने के लिए कहता है। अगर हम क्षमा करना नहीं सींखते तो हमारा स्वास्थ्य बदतर हो जाता है और कई बार हम समय से पहले मौत के शिकार हो जायेंगे।निर्दोष की हत्या करने और नरसंहार के बीज बोने वालो की जमींन बंजर हो जाती है ,उपज नहीं होती और लोगो को रोटी कमाने के लिए दूसरे देशो के धक्के खाने पड़ते है। बाइबिल के अनुसार परमेश्वर ने हर व्यक्ति के लिए एक सुरक्षित जीवन अपने ही पैदा होने वाली ज़मींन में दिया है और उसे वंही रोटी भी उपलब्ध कराने का प्रनन्ध भी, परन्तु उस देश में बीजे गलत बीज उसे दूसरे दर्ज़े का नागरिक बना कर विदेश में रोटी कमाने को मजबूर कर देता है। बाइबिल यह भी कहती है कि जीवन देने वाला और लेने वाला स्वयं परमेश्वर है , उसने एक दिन इस दुनिया से जाने के लिए हरेक के लिए मुकर्रर किया है। मनुष्य को दूसरे की जान लेकर परमेश्वर की बनायीं हुई

किसी मनुष्य विशेष के जीवन में योजना में हस्तेक्षेप उसके लिए बहुत भयानक सिद्ध हो सकता। हम आपको यह भी बताना चाहते कि बाइबिल के अनुसार आत्मा हत्या भी परमेश्वर की योजना का विरोध करना है। जीवन की कोई भी परिस्थ्तिी इतनी संगीन नहीं कि आप अपने जीवन को ले ले। आप अपना जीवन लेने के लिए परमेश्वर के न्याय सिंहासन के सामने दंड के भागीदार होंगे। प्रिय दर्शको आपका अपना ,आपके परिवार का ,आपके पडोसी का और हरेक का जीवन जीने के लिए ना कि मरने और मारने के लिए। यह घोर पाप है बुराई के बीज को बीजना है।

हिंसा से कई और रूप भी हो सकते है जैसे दूध , दवाई और खाने के सामान में मिलावट करना। डॉक्टर लोग पैसे के लिए जरूरत से अधिक दवाई देते है और तरह तरह के ऑपरेशन्स और प्रसव पीड़ा के बिना बच्चे को जनम देते है जिससे उनका पैसा बने। यह भी हिंसा की श्रेणी में आता है बेशक हम सब मेडिकल साइंस का सम्मान करते है कि

इसके द्वारा हमारा इलाज होता है। पुराने नियम की पुस्तक हैजेकेल के १८ : ३२ में परमेश्वर अपने चुने हुए लोगो से यह कहता है , हे प्रिय मरने की कोई जरूरत नहीं , प्रायश्चित करो और लम्बे समय तक जीओ। परमेश्वर ने ना तो अपना और ना किसी और का जीवन लेने के लिए कहा है। ऐसा करने बुराई को काटना है और अगर आपने ऐसा सोचा है तो परमेश्वर से क्षमा मांगिये !

बीजना और काटना – विश्राम !

 इस श्रंखला में हम बीजने और काटने की बात कर रहे है। यहाँ इसका उल्लेख खेती जैसे ही है पर यह नैतिकता और चरित्र से सम्बंधित बात है। परमेश्वर जिसने हमें जीने के लिए इस धरती पर भेजा है हमसे अपेक्षा करता है कि हम उसके बनाये हुए नियमो को माने जिससे उसका साया या कृपा हमारे ऊपर से ना उठे और हम उस दिन तक इस धरती पर रह सके जिस दिन उसने मुकर्रर किया है। बुराई को बीजना परमेश्वर को क्रोध दिलाता है और कई बार हमारा जीवन उसके निर्धारित हुए दिन से पहले ही खतम हो जाता है। बुराई शरीर के विभिन्न अंगो से की जाती है जिसका देने वाला परमेश्वर है। परमेश्वर घमंडी आँखों ,झूठ बोलने वाली जीभ ,निर्दोष का खून बहाने वाले हाथो , दुष्ट योजना बनाने वाले ह्रदय, और तेजी से बुराई की और बढ़ने वालो पैरो से नफरत करता है। झूठी गवाही देने वाले और समाज में उत्पात फ़ैलाने लोग भी उसकी घृणा के पात्र होते है। बाइबिल यह बताती है कि मनुष्य के शरीर की रचना ६ दिन के काम के बाद एक दिन के आराम के लिए बनी है। यह आपको घरेलू नोकरो ,कर्मचारियों और खेती में काम करने वाले बैलो और अन्य जानवरो पर भी लागू होती है। परमेश्वर जिसने दुनिया की हर चीज़ बारी बारी से रची थी उसने भी सातवे दिन विश्राम किया था तो यह हमारा भी कर्तव्य है कि हम अपने परिवार समेत आराम करे और अगर हमारे लिए लोग काम करते है उनको भी छोटी का दिन दे। अगर पैसे का प्रेम हमें ७दिन काम करने को विवश करता है तो हम अपनी बीमारी के बीज अपने और दुसरो के लिए बोते है। धनी और लालची व्यवसायी पैसे को परमेश्वर से अधिक प्राथमिकता देते है और वह सारे लेबर लॉस को तोड़ने का प्रयत्न करते है। परमेश्वर के नियमो के विरुद्ध बीजना अपने जीवन में दंड को आमंत्रित करना है। बाइबिल यह बताती है कि दुष्ट का घर नाश हो जायेगा जबकि धर्मी का तम्बू कायम रहेगा। क्या गलत है और क्या सही इसे आपका विवेक या ज़मीर बताता है क्योकि परमेश्वर का यह कानून हरेक के दिल में लिखा है और इसकी आवाज़ को ना सुनना अपने ही ऊपर न्याय को लाना है। ऐसा लिखा है कि परमेश्वर के डर से थोड़े पैसे का होना कही अच्छा है बजाय इसके कि कलह और उपद्रव से कमाया बहुत बड़ा धन। लालच पुरे परिवार को दुःख में डाल देता है लेकिन रिश्वत से घृणा करने वाले लम्बे समय तक जीते है। जो लोग बुराई का अनुसरण अच्छे आदमी को बर्बाद करने के लिए करते है उनके घर से बुराई कभी नहीं जाएँगी। प्रिय दर्शको अब क्रोना का प्रकोप
या महामारी जो हर देश में फैली है नर और नारी द्वारा बीजे हुई बुराई का परिणाम है। बाइबिल ऐसे जीवित परमेश्वर के बारे में बताती है जो हमें विश्वास के द्वारा जीते जी अपनी संतान बनाने का इच्छुक है। उसके पास स्वेछा से हर व्यक्ति आ सकता है और बुराई के कुप्रभाव से बच सकता है। लेकिन चुनाव आप पर निर्भर है कोई आपको बाध्य नहीं करता। इसे आप उसकी विशेषता मानिए कि वह जीवन और मृत्यु में से एक को चुनने का अवसर प्रदान करता है। दुनिया में उपस्थित परमेश्वर का आसमान से फेका हुआ फरिश्ता या स्वर्गदूत जिसका नाम लूसिफ़र या शैतान है मनुष्य को बहकाने में माहिर है और वह हर नर और नारी को गलत तरह से फुसला कर मरवाने और पाप कराने में कमी नहीं छोड़ता। सच्चाई तो यह कि नरक में आग की झील उसी के लिए बनाई गई है ना की मनुष्य के लिए। परन्तु वह नर और नारियो से पाप के बीज भिजवाकर उन्हें वहा भिजवा देते है। तो आप में मैं उसकी युक्तिओ और बहकावे से कैसे बचे ? इसका उतर बाइबिल देती है कि हम उसके भेजे हुए बेटे पर विश्वास करे उससे अपनी हर बुराई और पाप की क्षमा मांगे। ऐसा करने से आप उसको आपने मुक्तिदाता स्वीकार करेंगे और आपके जीवन में सुरक्षा, स्वास्थ्य , समृद्धि और सकूंन को उपलब्ध को लाएगा।उस दुःख को जो कोई नहीं समझता और उन आंसुओ को जो कोई नहीं देखता वह समझेगा क्योकि आप उसकी संतान का दर्जा विश्वास से हासिल कर चुके है। वह आपको हर बुराई को बीजने से बचाकर हर श्रॉप से मुक्त करके आशीर्वाद और आशा की और ले जाएंगा। 

गरीब की सुधि और बीमारी से चंगाई

भारत एक ऐसा देश है जहाँ गरीब को देखकर लोग दुत्कारते है, विधवा को शापित माना जाता है और अनाथ सड़को पर मारे मारे  फिरते है। यह आदमी की बनायीं हुई विचारधारा का परिणाम है। बाइबिल जो मनुष्य के बनाने वाले परम परमेश्वर का वचन है भजनसंहिता ४१ :१-३ में ऐसे कहता है , ” धन्य है वह व्यक्ति जो गरीब की सुधि लेता है, प्रभु उसे विपत्ति से छुटकारा देगा। परमेश्वर उसे कायम रखेगा और जिन्दा भी वह इस धरती पर आशीष पायेगा और वह उसे उसके शत्रुओ के हाथ में नहीं लगने देगा। वह उसको बीमारी के बिस्तर पर तड़पने नहीं देगा और उसकी देखभाल करेगा। ” बहुत से उद्योगपति ,लाला और प्रशासन अधिकारी बीमार और दुखी होते है और उन्हें कोई भी दवाई और इलाज नहीं लगता क्योकि उन्होंने गरीब को सताया है। अभी हाल ही में मैंने एक डोकुयुमेंटरी देखी जिसमे  कपड़े बनाने की फैक्ट्री का मालिक का इंटरव्यू लिया गया और उससे पुछा गया कि वह वर्करो से इतना काम तो लेता है पर इतनी काम तनखाह क्यों देता है।  उसका जवाब बहूत विचित्र था ,”इसलिए कि वह शराब पिएंगे या जुआ खेलेंगे” बाइबिल यह भी कहती कि गरीब को सूर्यास्त होने से पहले ना दी गयी मजदूरी रोजगार देने वालो को बहुत महँगी पड़ती है। गरीब की पुकार को न सुनना डॉक्टर के बिल को बढ़ाना और जल्दी मर जाने का संकेत है। आज जब क्रोना का प्रकोप है , भूख और महामारी का राज्य है तो जो गरीब की मदद कर सकते है अवश्य करे जिससे परमेश्वर वह आपको बीमारी के बिस्तर से डिस्चार्ज कर सके ! प्रिय दोस्त बाइबिल के अनुसार जीवन और मौत का चुनना मनुष्य ही के हाथ में है। जो आप बिजोगे वही पाओगे। इसमें कोई दो राय नहीं ! अपनी ज़िंदगी को लम्बे समय तक कायम रखने और स्वस्थ रहने का रहस्य गरीब की सुधि लेना है !
सबका रेडियो के सौजन्य से 

For your encouragement !

 प्रिय पास्टर साहब , मसीह भाईओ और बहनो ,
हज़ारो हज़ारो की तादाद में गरीब मज़दूर , अल्पसंख्यक , बहन, बेटीआ और बच्चे भूख , प्यास, थकान, बेरोजकारी और मौत के शिकार बनते जा रहे है। धनी और प्रभावशाली भाषण से रहे है और बस अपनी ही धुन में व्यस्त है ,उन्हें दूसरे के मरने से क्या लेना। ऐसा में मैं और आप जिस परमेश्वर पर विश्वास करते है,
उसकी सनातन भुजाये मनुष्य को रक्षा और शरण देने में सक्षम है। यह विवरण आप व्यवस्थाविवरण 33 :26 में पड़ सकते है। मूसा का परमेश्वर मेरा और आपका  परमेश्वरभी है और हमें मध्यस्था की प्राथना में उसे उन भारतीयों को बचाने के लिए विवश कर सकते है। कितनी ही भारतीय विदेशो में बैठे है , घर नहीं पहुंच सकते क्योकि अंतराष्ट्रीय विमान नहीं चल रहे ,कितने भारत के अंदर जहाजों , गाड़िओ और बसों के न चलने से फंसे पड़े है। कईओ की रोटी चली गयी है और कुछ जवानो ने आत्म -हत्या तक कर ली है। मैं और आप बचाने वालो के समूह में आते है और अगर हम व्यावहारिक रूप से उनकी सहायता नहीं कर सकते तो कम से काम उसके अलौकिक हस्तक्षेप के लिये अवश्य पुकार सकते है ! आईये हम मिलकर परमेश्वर के स्वर्गदूतो और उपस्थिति को बचाव कार्य करने का आवाहन दे !
स्वर्गीय पिता हम तेरी पुत्र येशु मसीह के वसीले से तेरे समक्ष आते है और तेरे से यह फरियाद करते है कि जम्मू और कश्मीर , पंजाब और हरियाणा ,हिमाचल और उत्तरांचल ,झारखण्ड और छत्तीसगढ़ ,उड़ीसा और वेस्ट बंगाल ,उतर पूर्व के सब राज्य , मध्य प्रदेश और राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र , गोवा और कर्नाटका, तमिलनाडु और केरला आंध्र प्रदेश और तेलंगाना और अन्य राज्यों में दुखी , पीड़ित , विवश ,व्याकुल, बीमारों और दुखिओं को अपने पंखो के निचे छुपायो। उनके लिए रोटी और रहने का प्रबंध करो , उनकी हर बीमारी को चंगा करो ,उन्हें मौत के फ़रिश्ते से बचाओ और देश भर में बेदारी लाओ जिससे आपका और भाई थॉमस का बलिदान व्यर्थ न जाये। आप मौत के परमेश्वर नहीं वरन जीवन के परमेश्वर हो ! हम आपके पीछे तब तक लगे रहेंगे जब तक आप हमारे लोगो को चंगा नहीं करोंगे और उनकी भलाई में हस्तक्षेप !
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सौभाग्य की कुंजी !

पुराने नियम के विश्वासीओ को परमेश्वर के वायदों और वाचाओं को बहुत लाभ था। उनकी परमेश्वर के प्रति विश्वसनीयता उनके सौभाग्य की कुंजी थी। आज जब क्रोना की महामारी फैली है और कोई हल नज़र नहीं आता तो परमेश्वर के यह वायदे हमारे अंदर साहस , उत्साह और आशा को उत्पन्न्न कर सकते है। उदहारण के तौर पर वचन में लिखा है।
व्यवस्थाविवरण 33 :26 – इस्राल के परमेश्वर जैसा कोई भी नहीं , वह स्वर्ग से अपने राजकीय वैभव से उतरता है जिससे वह तुम्हे (हर बाइबिल के विश्वासी को) हर तरह की सहायता पहुंचा सके। अन्नत काल का परमेश्वर तुम्हारा शरणस्थान है और निचे उसकी हमेशा कायम रहने वाली भुजाये है। वह तुम्हारे शत्रुओ को तुम्हारे सामने कुचल डालता है और वही कहता है “उनका नाश कर डालो ” इसलिए इस्राल सुरक्षित बसा रहता है।

2 इतिहास 11 -12 -तब आसा ने परमेश्वर को पुकारा और कहा आपके अलावा कोई भी ऐसा परमेश्वर नहीं जो असहाय को शक्तिशाली से बचा सके। हमारी सहायता कर क्योकि हम केवल तुझ पर भरोसा करते है और आप ही के नाम के कारण हम इस बड़ी सेना के सामने खड़े है। हे परमेश्वर मनुष्य तेरे सामने ना टिक पाए। इसलिए परमेश्वर ने ईथोपीनो को आसा और उसकी सेना के समक्ष हराया और वह बुरी तरह से भागे।

नए नियम में इफिसिओ की पत्री के ६ठे अध्याय में आत्मिक युद्ध की प्रेरणा दी गयी है और इसका लड़ना हमें रोजमर्रा की ज़िंदगी में जीत दिला सकती है। परमेश्वर का हर दास और दासी अपने प्रभाव के दायरे में विजय को पा सकते है अगर वह अन्नत काल वाले परमेश्वर की भुजाओ के निचे शरण पाए।

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Mercy from Creator God !

Turn to God and be healed.This is the time to return to our Creator God who is Father as well.He is not a cruel dictator who sends police to beat you when you ask right to live, food and health.People are suffering in many countries but spirit of compassion is missing.God´s supernatural protection,provision and healing still works . He is above religion but God of relationship. More better relationship more you influence by praying and requesting.He is the one who made road for His people in the sea.

Genuine Repetance !

Habakuk the prophet of the old testament sees evil in the society and cries out for mercy and not wrath from God. God´s judgement has fallen on almost every nations of the world through Corona virus. Thousands are dying and no cure seems to be working. When peoples and societies take God out of context of their lives  than God says, “Evil shall slay the wicked.” and “enough is enough”. “God is not mocked whatever a man, society or nation sows same he shall reap “. This is time for genuine repentance and turn to God for mercy. He alone can take this plague away.

   तहेदिल से प्रायश्चित !

जब क्रोना वायरस का बोलबाला हर मीडिया और  हर देश के लोगो के मुंह पर है और कई तरह के अनुमान, विचारधाराएं, डॉक्टरों के विश्लेषण सोशल मीडिया पर पढ़ने और सुनने को मिलते है और संकट से बाहर निकलने का कोई आसान तरीका नहीं आता। हज़ारो की रोटी चली गयी, लोग सफर नहीं कर पा रहे और सबकुछ अस्त व्यस्त होता जा रहा है तो बाइबिल का विश्वासी क्या करे ? बाइबिल यह कहती है कि वह परमेश्वर का यह स्मरण दिलाये जो हबक्कूक ३:२ में लिखा है ,” हे परमेश्वर , मैंने तुम्हारी प्रसिद्धि के बारे में सुना है, मैं आपको कामो को सुनकर डर से काँप जाता हूँ, प्रभु उन्हें फिर से हमारे समय में करो और आपने क्रोध में दया को मत भूलो !” तहेदिल से प्रयाश्चित और विलाप हर देश के लिए आवश्यक हो गया है। परमेश्वर का  क्रोध अत्याचार , अन्याय ,हिंसा , बलात्कार , चोरी , रिश्वत , अश्लीलता, सत्ता का दुरूपयोग और हर किसम की अश्लीलता  के रूप में विश्व भर में नज़र आ रहा है।  सबसे बड़ा वायरस पाप है जिसकी सजा मौत है। लोग परमेश्वर के भय से दूर चले गए है और पैसे से स्वास्थ्य ,खुशहाली और शांति को खरीदना चाहता है जो संभव नहीं। अगर कोई मनुष्य, समाज और देश सही परमेश्वर के ज्ञान को जानते हुए उसका तिरस्कार करता है और झूठे आडम्बर के धरम क्रम में फंसा रहता है तो वह बस धार्मिक बन कर रह जाता है। धर्म मनुष्य को रीति रिवाज़ो का गुलाम बनाता है परन्तु परमेश्वर उसे पापो और मृत्यु दोनों से आज़ाद करता है। गुड फ्राइडे के दिन येशु मसीह जो परमेश्वर के पुत्र थे हमारे पापो से  लिए मरे और ईस्टर के दिन हमें मौत के शाप से निकलाने के लिए मुर्दो से ज़िंदा हो उठे और पाप और मौत दोनों ही से स्वतंत्रता हमें उसके द्वारा मिली जो हमारे सबसे बड़ा दुश्मन है। क्रोना वायरस हर समाज और देश के लिए परमेश्वर के भेजे हुए न्याय की निशानी है और अगर हम मध्यस्था की प्राथना करके परमेश्वर की दया की पैरवी करते है तो सबकुछ फिर सामान्य हो जायेगा। मूसा और दाऊद दोनों उसके गुस्से को दया में बदलवाने में सफल हुए थे और हम भी ऐसा करवा सकते है।
अमरजी , सबका रेडियो 

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क्रोना वायरस

जब सब जगह क्रोना वायरस की चर्चा है और सामान्य जन जीवन अस्त व्यस्त है तो मेरा ध्यान २ शमूएल १५-२५ की और जाता है जहाँ राजा दाऊद की हठधर्मी से पुरे देश में महामारी आयी। राजा दाऊद के यह वचन बहुत दुखद है जहाँ वह कहता है मैंने बस मैंने पाप किया है ,इन निर्दोष भेड़ो प्रजा का क्या दोष किया है ! ऐसा हो कि आपका क्रोध मेरे और मेरे परिवार पर पड़े। दुनिया की सरकारे , प्रशासन और सत्ताधारी नेता केवल अपने राजनैतिक हित की बात करती है, अपने एजेंडे को आगे बढ़ाती है और परमेश्वर के उस महान आदेश का जो कहता है , ” अपने पड़ौसी से वैसे ही प्रेम करो जैसे आपने आपको ” तिरस्कार करती है। परमेश्वर के एजेंडे में हर नर और नारी बहुमूल्य है। उसकी जाति, कुल, आर्थिक स्थिति ,ओहदा ,और लिंग का परमेश्वर के प्रेम से वंचित होने से कोई रिश्ता नहीं। हम उपवास ,विलाप के साथ मध्यस्था की प्राथना के प्राथना करे और आराधना के स्थान की वेदी और चबूतरे के बीच में खड़े होकर रोये और परमेश्वर से कहे है प्रभु हमारे नेताओ , रहनामुओं और लीडर्स ने गलती की है और आपके नियमो और विधिओ का तिरस्कार किया है , हम उनके साथ साथ दोषी है कि हमने प्राथना नहीं की, सत्य का सामना नहीं किया और आज हम सब उसका परिणाम भुगत रहे है। हे परमेश्वर अपने फ़रिश्ते को भेज और क्रोना वायरस को रोक जैसे तूने विनाश के फ़रिश्ते को येरुसलेम पहुंचने से पहले रोका था। आपका वचन कहता है कि आप पछताए कि आपने महामारी भेजी। हे प्रभु आप तो जीवन के परमेश्वर हो ना कि मृत्यु के ! आपके बेटे का बलिदान २००० साल पहले मनुष्य को मृत्यु से बचाने के लिए दिया गया था ना की मारने के लिए नहीं। हम इस महामारी को रोकने के लिए आपके पास उस विधवा की तरह आएंगे जिसने अन्यायी न्यायधीश को रोज सुबह दरवाज़ा खटखटाकर थका दिया था। प्रभु बेटिया और बेटे सफर नहीं कर सकते,स्कूल नहीं जा सकते, व्यवसाय ठप है और मीडिया बस मौत की ही रिपोर्ट देता है।मुझे तो बस वह पुराना गाना याद आता है ,”दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समायी , कहे को दुनिया बनायीं ” क्या आपने मनुष्य को बस जीते जी बीमारी से मर जाने के लिए ही बनाया है। अगर ऐसे है तो उन्हें जीवन देने का क्या फायदा ! आप आम आदमी और जनता को सत्ताधारी क्रूर प्रशासकों के पापो की सजा मत दो। दया करो और इस महामारी को तुरंत रोको जिससे जीवन सामान्य हो जाये। यह सब हम अपने उद्धारकर्ता प्रभु येशु के नाम से मंगाते है , सुन और कबूल कर ! आमीन
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